जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और जलभराव रोकने पर सरकार का विशेष फोकस
जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और जलभराव रोकने पर सरकार का विशेष फोकस
चंडीगढ़, 11 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानसून के मद्देनजर प्रदेशभर में जल निकासी व्यवस्था, जलभराव की रोकथाम तथा संभावित बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की शुक्रवार देर रात व्यापक समीक्षा की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, मंडलायुक्तों तथा सिंचाई, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी, शहरी स्थानीय निकाय, विकास एवं पंचायत, राजस्व, स्वास्थ्य तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं, प्रदेश में कहीं भी जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो तथा आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करें और किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जिलों में जल निकासी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करें तथा फील्ड स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए। जिन क्षेत्रों में जलभराव की आशंका रहती है, उनकी पहले से पहचान कर वहां सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते पूरे किए जाएं। वर्षा के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों से पानी की शीघ्र निकासी सुनिश्चित की जाए, ताकि जनजीवन सामान्य बना रहे और नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी, शहरी स्थानीय निकाय, विकास एवं पंचायत, राजस्व, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। जल निकासी के लिए आवश्यक पंप सेट, मोटर, पाइप तथा अन्य उपकरण पूरी तरह कार्यशील अवस्था में तैयार रखे जाएं। उपमंडल स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश से गुजरने वाली नदी सहित सभी ड्रेन की नियमित निगरानी की जाए तथा जहां कहीं भी बरसाती पानी के प्रवाह में अवरोध हो, उसे तत्काल हटाकर निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यमुना नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश देते हुए कहा कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील क्षेत्रों में अधिकारियों की तत्काल तैनाती सुनिश्चित की जाए। राजस्व, सिंचाई, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभाग बाढ़ संभावित क्षेत्रों में समन्वित ढंग से कार्य करें, ताकि जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोग होने वाली मशीनरी, नावों, जनरेटर तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता एवं कार्यशीलता की नियमित जांच की जाए। सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी से संबंधित कंट्रोल रूम चौबीस घंटे सक्रिय रखे जाएं तथा आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह तैयार रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जलजनित एवं संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए तथा चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी न रहे।
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिला मानसून के दौरान नागरिकों की सुविधा के लिए अपना टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी करे, ताकि जलभराव, बाढ़ अथवा अन्य आपात स्थिति से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि जलभराव की प्रत्येक घटना का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसमें प्रभावित स्थान, पानी की निकासी में लगा समय तथा स्थिति सामान्य होने में लगे समय का समुचित विवरण दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर भविष्य के लिए स्थायी एवं दीर्घकालिक समाधान तैयार किए जाएंगे, ताकि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का प्रभावी एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहें।
