सितंबर में हरियाणा से 10,097 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह – सैनी

सितंबर में हरियाणा से 10,097 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह - सैनी

सितंबर में हरियाणा से 10,097 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह - सैनी

चंडीगढ़, 08 अक्तूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरूवार को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा छोटा प्रदेश है। देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1.3 प्रतिशत और कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा में है। फिर भी सितंबर 2026 में हरियाणा से 10 हजार 97 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी एकत्र हुआ। यह सभी राज्यों में पांचवां सबसे अधिक है और पूरे देश के घरेलू जीएसटी का 7 प्रतिशत से अधिक है।

इस दौरान उन्होंने तीन प्रस्ताव भी रखे। उन्होंने पहला प्रस्ताव रखते हुए कहा कि जीएसटी के शुरुआती वर्षों, यानी वित्त वर्ष 2017–18 से 2019–20 से जुड़े आदेशों के विरुद्ध अपील दायर करने की समय–सीमा में एक और, एकमुश्त छूट देने का है। नवंबर 2023 में सीमित अवधि के लिए अपील दायर करने का एक अवसर दिया गया था। हरियाणा में ऐसे 646 मामले हैं, जिनमें अपीलें केवल देरी के कारण खारिज हुई हैं। इन मामलों में 567 करोड़ 43 लाख रुपये की मांग है। इन आंकड़ों के पीछे ऐसे करदाता हैं, जो चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई गुण–दोष के आधार पर हो। एक न्यायपूर्ण और संवेदनशील कर–व्यवस्था को उनकी इस कठिनाई पर विचार करना चाहिए। पिछली अधिसूचना में, जिस मांग में कर शामिल नहीं था, उसके विरुद्ध अपील की अनुमति नहीं थी। हमारा सुझाव है कि प्रस्तावित छूट में कर, ब्याज और जुर्माने, हर तरह की मांग शामिल हो। वे मामले भी शामिल हों, जिनमें कर का कोई हिस्सा नहीं है और मांग केवल ब्याज या जुर्माने की है। इस सीमित छूट के लिए परिषद धारा 148 के तहत विशेष प्रक्रिया की सिफारिश करने पर विचार कर सकती है।

*प्रशासनिक तालमेल की स्पष्ट और व्यवहारिक व्यवस्था बनाई जाए*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि दूसरा प्रस्ताव उन कठिनाइयों से जुड़ा है, जो केंद्र और राज्य के जीएसटी अधिकारियों द्वारा एक साथ की जाने वाली प्रवर्तन कार्रवाई से पैदा होती हैं। करदाताओं को कई बार एक ही या आपस में जुड़े विषय पर दोनों कर प्रशासनों की ओर से समन, जांच, निरीक्षण और दूसरी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है। तब उन्हें बार–बार दस्तावेज देने और अपना पक्ष रखने में समय और संसाधन लगाने पड़ते हैं। हमें प्रशासनिक तालमेल की स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनानी चाहिए। हरियाणा का प्रस्ताव है कि इसके लिए तकनीक आधारित व्यवस्था बनाई जाए। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों के वैध प्रवर्तन अधिकार सुरक्षित रहें।

*इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा रखा प्रस्ताव*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पंजीकरण को पूर्व प्रभावी तारीख से किए जाने से जुड़ा प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून अधिकारी को यह अधिकार देता है कि वह अपनी तय की हुई तारीख से पंजीकरण रद्द कर सके। इस अधिकार के साथ एक शर्त होनी चाहिए, जिस अवधि के लिए इस बात के सुबूत हों कि करदाता ने वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति की है, उस अवधि के लिए पंजीकरण रद्द नहीं होना चाहिए। ऐसे कैंसलेशन से उन इमानदार खरीदारों का इनपुट टैक्स क्रेडिट भी खतरे में पड़ जाता है, जिन्होंने उस अवधि में, उस करदाता से माल या सेवाएं ली थी।

*नए सुधारों का किया स्वागत*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जीएसटी परिषद जिन नए सुधारों पर विचार कर रही है, हरियाणा उनका स्वागत करता है। इनका उद्देश्य ऐसी कर–व्यवस्था का नया दौर शुरू करना है, जो सिस्टम से होने वाले जोखिम–आकलन पर आधारित हो। ये प्रौद्योगिकी की मदद से निर्णय लेने की ओर भी ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण, संशोधन, कैंसेलेशन और रिफंड देने की प्रक्रिया में ऑटोमेशन और प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाने के प्रस्ताव सराहनीय हैं और हरियाणा इनका समर्थन करता है। इससे कर अधिकारियों का समय और ऊर्जा बचेगी, जिसे वे कर–चोरी रोकने जैसे अधिक उपयोगी काम में लगा सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सही करदाताओं के लिए व्यवस्था आसान होगी। उन्होंने ई–कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से आपूर्ति करने वाले छोटे करदाताओं के लिए पंजीकरण की सरल प्रक्रिया का, और सिस्टम–आधारित जोखिम विश्लेषण से रिफंड देने की व्यवस्था का भी स्वागत और समर्थन किया।

*पहली छमाही में 26 प्रतिशत की वृद्धि*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2025–26 में हरियाणा का राज्य जीएसटी राजस्व, आईजीएसटी सेटलमेंट में राज्य के हिस्से को मिलाकर, 39 हजार 743 करोड़ रुपये से बढ़कर 48 हजार 289 करोड़ रुपये हो गया। 22 प्रतिशत की यह वृद्धि सभी राज्यों में सबसे अधिक रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष के पहले छह महीनों में राज्य जीएसटी राजस्व 29 हजार 108 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 23 हजार 58 करोड़ रुपये था। यह 26 प्रतिशत की वृद्धि है, जो राज्यों में दूसरी सबसे अधिक है, जबकि राष्ट्रीय औसत 16 प्रतिशत है। इसका श्रेय उन्होंने हरियाणा के उद्योगपतियों, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं की मेहनत को और ईमानदार करदाताओं को दिया। उन्होंने बताया कि इसे और आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार ने 30 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रदेश के कर–राजस्व को मजबूत करने पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।

*कम दरें और बढ़ता राजस्व, दोनों साथ–साथ चले*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने याद दिलाया कि एक वर्ष पहले परिषद की सिफारिश पर 22 सितंबर 2025 से देश में जीएसटी दरों का सरल ढांचा लागू हुआ था। मोटर वाहनों और ऑटो पार्ट्स, ट्रैक्टरों और कृषि मशीनों, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ा, खाने–पीने की चीजों, रोजमर्रा के सामान और दवाइयों पर कर घटाया गया। व्यक्तियों के जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा को कर से छूट दी गई। उन्होंने कहा कि उस समय राजस्व को लेकर चिंता होना स्वाभाविक था, लेकिन हरियाणा का एक वर्ष का अनुभव उत्साह बढ़ाने वाला है। जिन क्षेत्रों में दरें घटाई गईं, उनमें हरियाणा के करदाताओं का टर्न ओवर एक वर्ष पहले की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। ट्रैक्टर और उनके पुर्जों में यह 52 प्रतिशत और ऑटो पार्ट्स में 46 प्रतिशत अधिक है, और राजस्व भी लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश में ऑटोमोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र है, इसलिए यह उसके लिए विशेष महत्व रखता है। इस राहत का लाभ किसान, मध्यम वर्ग के परिवार और छोटे व्यापारी तक पहुंचा है और यह बढ़ी हुई मांग के रूप में अर्थव्यवस्था में वापस आया है।

*विकसित भारत 2047 के संकल्प के लिए हरियाणा का पूरा सहयोग*

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसे पूरा करने के लिए हरियाणा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार राजस्व बढ़ाने और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर लगातार काम कर रहा है। जीएसटी देश में सहकारी संघवाद का मजबूत उदाहरण है। जो भी सुधार इसे ईमानदार करदाता के लिए सरल बनाता है और राजस्व को सुरक्षित करता है, वह देश को ‘विकसित भारत’ के संकल्प के और करीब ले जाता है। उन्होंने परिषद को हरियाणा के पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्रीय वित्त मंत्री के नेतृत्व में हरियाणा केंद्र और सभी राज्यों के साथ मिलकर ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए काम करता रहेगा।

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