पंजाब के सीमावर्ती जिलों की जेल और OOAT क्लीनिकों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

पंजाब के सीमावर्ती जिलों की जेल और OOAT क्लीनिकों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

पंजाब के सीमावर्ती जिलों की जेल और OOAT क्लीनिकों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

चंडीगढ़, 2 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सीमावर्ती जिलों अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का सहित गुरदासपुर और कपूरथला की जेलों तथा ओट (ओ.ओ.ए.टी.) क्लीनिकों में नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के चल रहे चिकित्सकीय उपचार के साथ-साथ उनकी मनो-सामाजिक देखभाल को और मजबूत करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

यह फैसला आज यहां मुख्यमंत्री और ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बैठक के दौरान लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस पहल के तहत ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ पर आधारित आध्यात्मिक सुधार कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य दवाइयों के उपचार और लंबे समय के मनो-सामाजिक पुनर्वास के बीच के अंतर को पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि हालांकि, पंजाब ने नशों से पीड़ित लोगों के लिए दवाइयों की पहुंच को बड़े स्तर पर बढ़ाया है, लेकिन उपचार के शुरुआती महीनों के दौरान मरीजों को इससे जोड़े रखना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “दवाइयों के साथ-साथ नशा छोड़ रहे व्यक्ति की मानसिक अवस्था को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नशा-मुक्ति केवल चिकित्सकीय उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जज्बातों और दृढ़ इच्छाशक्ति की भी लड़ाई है। राज्य सरकार नशों से लड़ रहे प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक और सकारात्मक जिंदगी की ओर ले जाने और उनके पूर्ण पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने कहा, “यह पायलट वेलनेस कार्यक्रम मौजूदा चिकित्सकीय उपचार का पूरक बनेगा और मेडिकल स्टाफ के सहयोग से समानांतर रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की रूपरेखा इस ढंग से तैयार की गई है कि प्रशिक्षित स्थानीय अमला धीरे-धीरे इसकी बागडोर संभाल लेगा, जिससे बाहरी सहायता पर निर्भर रहे बिना इसका निरंतर संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यह पहल नशों के खिलाफ महज कानूनी कार्रवाई से आगे बढ़कर पुनर्वास, दोबारा नशे की लत लगने से रोकने, सामुदायिक सहभागिता और लंबे समय के सुधार पर अधिक जोर देते हुए ‘ युद्ध नशों विरूद्ध ’ को और मजबूती देगी।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब नशों के विरुद्ध अपनी लड़ाई हर संभव साधन जैसे कि चिकित्सकीय उपचार, काउंसलिंग, पुनर्वास, सामाजिक सहयोग और सख्त कानूनी कार्रवाई के माध्यम से जारी रखेगा। हमारा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है: लोगों को उपचार तक केवल लाना ही नहीं, बल्कि उन्हें उपचार से जोड़े रखना और आत्मसम्मान तथा इज्जत भरी स्वस्थ जिंदगी की ओर वापस मोड़ना है।”

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने नशों की सप्लाई चेन तोड़कर और तस्करों को सलाखों के पीछे भेजकर पहले ही नशा तस्करी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। अब अगला महत्वपूर्ण कदम नशे से प्रभावित लोगों का समय पर और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करना है ताकि वे अपना जीवन आत्मसम्मान के साथ जी सकें।”

इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को मानसा और संगरूर जिलों में भूजल के रिचार्ज और संरक्षण के लिए व्यापक रणनीतियां तैयार करने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा, “यह पहल पहले मानसा और संगरूर में लागू की जाएगी और बाद में इसका विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भूजल की एक-एक बूंद बचाना जरूरी है ताकि प्रकृति के इस अनमोल उपहार को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन जागरूकता अभियान के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों के साथ तालमेल सुनिश्चित करे ताकि किसानों, युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के सभी वर्गों तक पहुंच बनाई जा सके।”

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने लंबे समय की जल सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूलता सुनिश्चित करने के लिए पहले ही बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के भूजल के घट रहे स्तर को बचाना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।”

भूजल के संरक्षण के महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने बताया, “सरकार ने नहरी पानी के अधिकतम उपयोग के लिए पंजाब भर में खालों, कस्सियों और सुइयों का विशाल नेटवर्क स्थापित किया है, जिसके तहत 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार सत्ता में आई थी तो कृषि सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा था, जो अब बढ़कर 88 प्रतिशत हो गया है।”

नहरी सिंचाई ढांचे के कायाकल्प के परिणाम साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया, “वर्ष 2022 में राज्य के 166 ब्लॉक भूजल का स्तर घटने के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे थे, जबकि 2026 में यह संख्या घटकर 152 रह गई है। इन 152 ब्लॉकों में से भी 90 ब्लॉक लगातार सुधार की ओर बढ़ रहे हैं, जहां भूजल का स्तर एक से डेढ़ मीटर तक ऊपर आ गया है, जो कि अधिक संतोष की बात है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “धान पंजाब की मुख्य फसल नहीं है, लेकिन फिर भी हमारा राज्य देश के अन्न भंडार के लिए हर साल लगभग 180 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन करता है।”

उन्होंने कहा, “पानी की सुरक्षा के लिए पंजाब की यह चुनौती हमारे राज्य के भविष्य की चुनौती है और हमारी सरकार नहरी सिंचाई ढांचे को और मजबूत करना, पानी के संरक्षण को प्रोत्साहित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य के बहुमूल्य भूजल को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाना जारी रखेगी।”

इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ की ओर से व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया के चेयरमैन ब्रह्मचारी प्रज्ञा चैतन्य और अन्य प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।

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