मानसून से पहले तैयारियां तेज, बाढ़ नुकसान कम करने पर सरकार का फोकस

मानसून से पहले तैयारियां तेज, बाढ़ नुकसान कम करने पर सरकार का फोकस

मानसून से पहले तैयारियां तेज, बाढ़ नुकसान कम करने पर सरकार का फोकस

चंडीगढ़, 27 अप्रैल। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करते हुए पंजाब के बाढ़ रोकथाम और राहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से उन्नत एम्फीबियस मशीनों (पानी में और जमीन पर चलने वाली मशीनों) की खरीद को मंजूरी दे दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार मानसून सीजन से पहले बाढ़ या भारी बारिश के कारण होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने और जान-माल की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बाढ़ राहत कार्यों को सुचारू और परेशानी मुक्त तरीके से चलाने के लिए पंजाब सरकार ने नहरों और नालों (ड्रेनों) की सफाई के लिए एम्फीबियस मशीनें खरीदने की सहमति दे दी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ये मशीनें बहते पानी में भी काम करने और गहराई तक सफाई करने में सक्षम हैं, जो इन्हें रोकथाम उपायों और आपातकालीन कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा कि ये बहु-उद्देशीय मशीनें गहराई तक सफाई कर सकती हैं, जिसके लिए संभावित और आपातकालीन स्थितियों में बाढ़ राहत कार्यों के लिए हमारे पास ये मशीनें होना समय की जरूरत है। उन्होंने विभाग को इन मशीनों की खरीद के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

वैश्विक स्तर पर बेहतर अभ्यासों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मैंने हाल ही में फिनलैंड की अपनी यात्रा के दौरान इस मशीन को काम करते देखा था, जहां इन बहु-उद्देशीय मशीनों का पूर्ण उचित तरीके से उपयोग किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन मशीनों का उपयोग बाढ़ सुरक्षा कार्यों के साथ-साथ नहरों, नालों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की देखभाल और सफाई के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन मशीनों की खरीद से बाढ़ के कहर के कारण लोगों को आने वाली मुश्किलों को कम करने में अधिक मदद मिलेगी।

पानी के प्रबंधन संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाखड़ा डैम में पानी का अधिकतम स्तर 1680 फीट है और 26 अप्रैल को यह 1594 फीट दर्ज किया गया था।”

उन्होंने कहा कि 1 जून से शुरू होने वाली धान की बिजाई को ध्यान में रखते हुए आगामी मानसून को देखते हुए सुचारू रूप से पानी छोड़ने की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राज्य में 1 जून से धान की बिजाई शुरू की जा रही है, इसलिए आगामी मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए भाखड़ा डैम से अधिक से अधिक पानी छोड़ा जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “राज्य में नए खालों के निर्माण और पुराने खालों को बहाल करने का काम 31 मई तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद सिंचाई के उद्देश्यों के लिए अतिरिक्त 5000 क्यूसेक पानी की जरूरत होगी।”

चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जल स्रोत विभाग के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “जनता के हित को ध्यान में रखते हुए बाढ़ को रोकने के लिए पूरे राज्य में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि खालों की सफाई युद्ध स्तर पर चल रही है और जल्द ही पूरी हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि संभावित बाढ़ को रोकने के लिए बाढ़ प्रभावित प्रमुख स्थानों पर गार निकालने का काम पहले ही पूरा कर लिया गया है।

संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा रोपड़ जिले में जहां लगभग 20 गांव बाढ़ की मार झेल रहे हैं और जहां पिछले साल भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था, वहां व्यापक रोकथाम कदम उठाए गए हैं।” उन्होंने कहा कि बाढ़ को नियंत्रित करने और निवासियों को राहत प्रदान करने के लिए जरूरत अनुसार स्टड और स्पर संरचनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को सिंचाई और पर्यटन दोनों उद्देश्यों के लिए स्वां नदी के चैनलाइजेशन की संभावना की पड़ताल करने के भी निर्देश दिए।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और बरिंदर कुमार गोयल, लोकसभा सदस्य मालविंदर सिंह कंग, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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