जैन आराधना मंदिर में कार्यक्रम, सीएम सैनी ने शांति और प्रेम का दिया संदेश
जैन आराधना मंदिर में कार्यक्रम, सीएम सैनी ने शांति और प्रेम का दिया संदेश
चंडीगढ़ , 19 अप्रैल। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज जैन धर्म की मूल भावना-अहिंसा परमो धर्म:, पहले से अधिक प्रासंगिक है। यह दुनिया के विभिन्न संघर्षों, युद्धों और हिंसा के बीच शांति और प्रेम का संदेश दे रही है। इस धर्म का वर्षी तप पारणा पर्व आज युवा वर्ग के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है। यह आत्मनियंत्रण और धैर्य का महत्व समझाता है। यदि युवा पीढ़ी इन मूल्यों को जीवन में अपनाएं तो उनके व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र भी प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होंगे।
मुख्यमंत्री रविवार को करनाल में श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में आयोजित विशेष धर्म सभा में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने पीयूष ब्लॉक अस्पताल के प्रथम तल का शिलान्यास, दो पक्षी मीनारों व जीव सेवा केंद्र का उद्घाटन भी किया। उन्होंने अस्पताल में दाखिल मरीजों का हालचाल जाना व मंदिर में भगवान श्री घण्टाकर्ण महावीर की आराधना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने समाजसेवियों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज अक्षय तृतीया है। आज ही भगवान परशुराम जी अवतरित हुए थे। आज वर्षी तप पारणा पर्व भी है। भगवान ऋषभ देव ने 400 दिनों के उपवास का गन्ने के रस से पारणा किया था। उन्होंने प्रदेशवासियों को इन पावन दिवसों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज “वर्षी तप पारणा पर्व” आराधना मंदिर में मनाया जा रहा है। यह हिन्दू, जैन तथा बौद्ध परंपराओं में सम्मानित स्थान प्राप्त महा प्रभावी घण्टाकर्ण महावीर देवता का तीर्थ है। यहां महाप्रभावी ओसिया माता का धर्मस्थल भी है। यहां गुरुदेव मनोहर मुनि का समाधि मंदिर आस्था का केन्द्र है। यहां हर महीने लोगों को जीवन जीने की कला के मार्गदर्शन के लिए आत्म शान्ति शिविरों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्षी तप पारणा पर्व महावीर दानवीर कर्ण की नगरी में मनाया जा रहा है। महावीर कर्ण स्वयं महादानी और दृढ़ व्रती थे। इस नगरी में उनकी आध्यात्मिक तरंगें आज भी फैली हुई हैं। इसका प्रमाण यह है कि उनके सामने आज भी अनेक महादानी और दृढ़ व्रती बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि करनाल आने पर उन्हें यहां की समाज सेवी संस्थाओं से विशेष प्रेरणा मिलती है।
श्री सैनी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत न केवल निरंतर प्रगति कर रहा है, बल्कि प्राचीन संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को भी पूरी दुनिया में नई पहचान दिला रहा है। पिछले 11 वर्षों में देश में सांस्कृतिक संरक्षण और पुनरुद्धार के ऐतिहासिक कार्य हुए हैं।
उन्होंने भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण, महाकालेश्वर कॉरिडोर, और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सब प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में उस पवित्र स्थल का जीर्णोद्धार किया गया है जहां भगवान श्री कृष्ण ने गीता का अमर संदेश दिया था। प्रधानमंत्री न केवल आधुनिक भारत के निर्माण में जुटे हैं, बल्कि गुरुओं और मुनियों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म में कठोर तप व त्याग का बड़ा महत्व है। जैन अनुयायी 14 सालों तक कठोर तप करके मुनि बनता है। वर्षी तप का भी जैन धर्म की महान तप परंपरा में विशेष स्थान है। यह आत्म शुद्धि, संयम और त्याग का व्रत है। जैन धर्म ने सदियों से मानव मात्र को जीवन की सच्ची राह दिखाई है। तीर्थंकरों और मुनियों द्वारा स्थापित मूल्यों व सिद्धांतों को अपनाकर ही मानव सभ्यता फल-फूल रही है। उन्होंने कहा कि संत गौरव पीयूष मुनि महाराज ने अपनी साधना के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, राष्ट्र निर्माण, जीव दया, प्रकृति संरक्षण आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की पावन धरा पर जैन धर्म का बोलबाला रहा है। गुरुग्राम, रोहतक, फरीदाबाद, भिवानी और हिसार के क्षेत्र हजारों वर्ष पूर्व जैन संस्कृति से ओत-प्रोत रहे हैं। इन क्षेत्रों में मिले शिलालेख व तीर्थंकरों की प्रतिमाएं इस बात का प्रमाण हैं। आज भी प्रदेश के हर क्षेत्र में जैन मंदिर तथा स्थानक स्थित है। जैन समाज का प्रदेश के विकास में बड़ा योगदान है। सरकार राज्य में सभी धर्मों के सम्मान और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार का संकल्प है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बुजुर्ग श्रद्धालु धन के अभाव में तीर्थ यात्रा से वंचित न रहें। इसी उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना चलाई हुई है। अब 5 मई को नांदेड़ साहिब के लिए कुरुक्षेत्र से ट्रेन भेजी जाएगी।
इस अवसर पर पीयूष मुनि जी महाराज ने कहा कि अक्षय तृतीया का दिन भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि यह त्याग, तपस्या और दान की पराकाष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ केवल भौतिक सुख-सुविधाओं, मनोरंजन या बाहरी दिखावे तक सीमित नहीं है। सच्ची आध्यात्मिकता हमारे भीतर के प्रकाश को जगाने और जनसेवा के मार्ग पर चलने में निहित है।
उन्होंने बताया कि भगवान ऋषभदेव ने 12 महीने तक निरंतर तपस्या की। उस समय लोग मुनि चर्या और भिक्षा की विधि से अनभिज्ञ थे। राजा होने के बावजूद, जब वे भिक्षा के लिए जाते, तो लोग उन्हें चांदी, मोती और कीमती वस्तुएं भेंट करते थे, जिन्हें वे स्वीकार नहीं करते थे, 12 महीने के लंबे अंतराल के बाद, उनके पौत्र श्रेयांश कुमार ने देवी प्रेरणा से उन्हें इक्षु रस (गन्ने का रस) आहार के रूप में प्रदान किया, जिससे उनका पारणा (तपस्या का समापन) हुआ।
यह घटना हमें सिखाती है कि सही समय पर किया गया निस्वार्थ दान और सेवा का कितना बड़ा मूल्य होता है। उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अक्षय तृतीया का महत्व अद्वितीय है। जहां अन्य तिथियां चंद्रमा की गति के साथ घटती-बढ़ती हैं, वहीं अक्षय तृतीया का पुण्य कभी क्षय नहीं होता। इसीलिए इसे सभी मंगल कार्यों के लिए सर्वाधिक शुभ माना गया है।
इस मौके पर इंद्री विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार कश्यप, करनाल के विधायक जगमोहन आनंद, असंध के विधायक योगेंद्र राणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
